बिहार में इस साल बम्पर बहाली - शिक्षक, कर्मचारी और पुलिस

बिहार में इस साल बम्पर बहाली – शिक्षक, कर्मचारी और पुलिस

इस साल बम्पर बहाली – नीतीश सरकार ने बजट में वादों की जबर्दस्त बसंती बयार बहाई। बसंत पंचमी के मौके पर हर वर्ग को बहार का अहसास कराया है। 2.64 लाख से अधिक सरकारी नौकरियों के झोंके और 20 लाख रोजगार के वादे के इर्द- गिर्द ही बजट मंडरा रहा है। यह कोरी घोषणा नहीं, बल्कि नियुक्ति करने वाले आयोगों को रिक्तियां भेजी जा चुकी हैं। बजट में युवाओं को आकर्षित करने की हर जुगत है।

पहली बार बने खेल विभाग को स्कीम मद में 150 करोड़ दिया जाना इसी का हिस्सा है। चौथे कृषि रोडमैप के जरिए किसानों को साधने का भी पासा फेंका है। बिहार लघु उद्यमी योजना को गरीबी उन्मूलन का कारगर जरिया मानते हुए प्रति परिवार दो लाख रुपए देकर उन्हें कारोबारी बनाने पर खास फोकस है। इस योजना की राशि 250 करोड़ से बढ़ाकर 1000 करोड़ कर दी गई है।

नई सरकार गठन के ठीक पहले तैयार 2 लाख 78 हजार 725 करोड़ के बजट को वित्त मंत्री सम्राट चौधरी ने पेश किया और लोकलुभावन घोषणाओं की झड़ी लगा दी। वर्ष 2000 में सात निश्चय-2 चुनावी घोषणा-पत्र में रूप में सामने आया। इसमें तय प्राथमिकताओं को पूरा करने की दिशा में ही वित्त मंत्री का भाषण घूमता रहा। नियुक्ति और रोजगार सात निश्चय-2 का प्रमुख हिस्सा है। वित्त मंत्री ने राज्य की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को औद्योगिक अर्थव्यवस्था की ओर अग्रसर होने का संकेत दिया।

वित्त मंत्री ने शोध और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, ड्रोन तकनीक, श्री-डी प्रिंटिंग, रोबोटिक्स आदि को प्रोत्साहन देने का संकल्प जताया। किसानों के लिए 102 करोड़ की लागत से 100 सीड हब विकसित किए जाने की घोषणा की। 52 लाख महिलाओं को कृषि की नई तकनीक से जोड़ने और 85 जैविक क्लस्टर विकसित करने के इरादे भी जताए।

सरस्वती पूजा से ठीक एक दिन पहले पेश बजट में 9वीं-12वीं के विद्यार्थियों की राह आसान करने के लिए अलग से विशेष कक्षाओं के संचालन को विस्तार देने की बात कही गई तो कक्षा-3 से 8वीं तक के कमजोर छात्रों के लिए मिशन दक्ष का ऐलान किया।

पिछले साल की ही तरह शिक्षा बजट सबसे बड़ा है। बजट में योजनाओं पर कुल जितना पैसा खर्च होगा, उसका 22% हिस्सा यानी 22,200 करोड़ शिक्षा विभाग की योजनाओं पर ही व्यय होना है। पिछले साल भी इतना ही पैसा खर्च हुआ। लेकिन वेतन मद में 12, 189 करोड़ बढ़ गया है। वजह, शिक्षकों की नियुक्ति है।

देश की तुलना में राज्य के गांवों में प्रति व्यक्ति अधिक पेजयल की आपूर्ति। देश का औसत 55 लीटर है तो बिहार में सप्लाई 70 लीटर है। हर घर नल का जल, योजना से छूटे 16,426 वाडाँ और 3393 टोलों में काम जारी है। लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग के बजट में 1000 करोड़ की बढ़ोतरी की गई है।

सड़कों के चौड़ीकरण, सुगम यातायात के लिए फ्लाईओवर, आरओबी, बायपास, पुलों आदि के निर्माण के साथ-साथ सड़कों के बेहतर रखरखाव और रोड सेफ्टी पर फोकस कायम है। लेकिन विभाग के स्कीम मद में तकरीबन 200 करोड़ की कटौती हो गई है। जेपी सेतु के समानांतर नए पुल की मंजूरी मिली है।

राज्य में दो करोड़ कनेक्शन दिए गए हैं। बिहार पहला राज्य है जहां स्मार्ट प्री-पेड मीटर लगाए जा रहे हैं। 25 लाख मीटर लग चुका है। संरचना दुरुस्त रखने के लिए विभाग में 2640 नियुक्ति होगी, इसमें 2000 पद तकनीशियन के होंगे। विभागीय स्कीम का बजट 1586.52 करोड़ है। पिछले साल भी इतना ही था।

बेहतर स्वास्थ्य सेवा और संरचना विकास पर जोर है। लेकिन बजट में 2000 करोड़ की कटौती हो गई है। पिछले साल की तुलना में स्कीम मद की राशि तो मात्र 1.01 करोड़ घटी है। लेकिन, स्थापना मद यानी वेतन आदि के व्यय में 2 हजार करोड़ रुपए की कटौती हो गई है।

बजट में स्थापना मद में बड़ी कटौती का संकेत है कि स्वास्थ्य विभाग में इस साल नई नियुक्तियां नहीं होंगी।

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Result इस साल बम्पर बहाली

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