करोड़ों रूपये

मछली पालन कर कमा सकते हैं करोड़ों रूपये – ऐसे करें शुरू

मछली पालन कर कमा सकते हैं करोड़ों रूपये :- आजकल मछली पालन जिले के युवाओं को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है. कई युवा अपनी पढ़ाई व नौकरी छोड़कर मछली पालन का व्यवसाय शुरू कर रहे हैं. इसका मुख्य कारण कम जगह में ज्यादा उत्पादन और अच्छी कमाई है. इसमें सरकार भी मदद कर रही है. केंद्र व राज्य सरकार इसके लिए कई योजनाएं चल रही हैं, जिससे करीब 70 प्रतिशत का तक का अनुदान भी मिल रहा है.में मत्स्य पालन के लिए प्रशिक्षण भी दिया जाता है. प्रभात खबर से बातचीत के दौरान इन युवाओं ने कहा कि मछली पालन करके कम क्षेत्र में ज्यादा उत्पाद और बंपर मुनाफा कमाया जा सकता है. इंजीनियरिंग किये छात्रों ने भी इस क्षेत्र में अपना कदम बढ़ाया है और तकनीकी व वैज्ञानिक रूप से मछली पालन कर रहे हैं.

आजकल शहर के युवा न सिर्फ मछली पालन से मोटी कमाई कर रहे हैं, बल्कि कई लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं. राजधानी पटना सहित बिहार के रहने वाले ये युवा अच्छी-खासी नौकरी छोड़ कर इन दिनों फिश फार्मिंग पर ध्यान दे रहे हैं. इससे उन्हें अच्छी आमदनी हो रही है. मछली पालन में आत्मनिर्भर बन रहे शहर के कई युवाओं पर पढ़िए आज लाइफ सिटी की कवर स्टोरी.

जिले के बिहटा प्रखंड अंतर्गत परी गांव के पंकज कुमार आइसीआइसीआइ बैंक में ब्रांच मैनेजर रह चुके हैं. 15 साल तक यहां काम करने के 5 बाद पांच साल तक सिपला फार्मास्यूटिकल्स में भी नौकरी किया. लेकिन शुरुआत से ही उन्हें व्यापार करने की चाहत थी. फिर नौकरी छोड़कर पंकज कुमार, वे मछली पालन बिहटा, पटना के व्यवसाय से गये. इसकी शुरुआत उन्होंने जुड़ अपने गांव से ही की. पंकज कहते हैं, तालाब व बायोफ्लॉक का निर्माण कराकर मछली पालन करता हूं. अब तो रंगीन मछलियों का भी व्यापार अच्छा चल रहा है. बहुत जल्द मशरूम तैयार करने की भी योजना है. वे कहते हैं, लोगों के बीच मछली की बहुत खपत है और उस हिसाब से ताजा मछली लोगों को मिल नहीं पाती है. इसलिए कमाई की संभावना बढ़ जाती है. अगर लगन हो और व्यक्ति मेहनती हो तो कोई भी काम असंभव नहीं है.

जिले में लोग मछली पालन का व्यवसाय तेजी से कर रहे हैं. ऐसे ही एक युवा हैं मो तसलीम, जो नौबतपुर के नजदीक विक्रम रोड में मछली पालन करते हैं. वे बीटेक कर पिछले 25 वर्षों से सिविल इंजीनियरिंग का काम करते थे. लेकिन, नौकरी रास नहीं आयी और मछली पालन की विशेष जानकारी लेने के बाद पत्नी रेहाना खातून के साथ इस व्यवसाय की शुरुआत की. वे वैसे तो कई मछलियों की प्रजातियों का उत्पादन करते हैं, पर ‘जासर’ का उत्पादन ज्यादा होता है, क्योंकि बाजार में इसकी डिमांड ज्यादा है. मो तसलीम व उनकी पत्नी पांच साल पहले सरकार की योजना की मदद से 15 एकड़ में तालाब का निर्माण कराया है. आज की डेट में 40 एकड़ में तालाब तैयार हो चुका है. वे कहते हैं कि साल भर में करीब एक करोड़ का कारोबार हो जाता है. रेहाना खातून, नौबतपुर, पटना

एनआइटी पटना से इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद आशुतोष सिंह ने सैमसंग ज्वाइन किया था. यहां वे दस साल तक कार्यरत रहे. फिर, जॉब छोड़कर अपने दो मित्रों आशीष व अविनाश के साथ गांव लौट आये. तीनों दोस्त ग्रामीण पृष्ठभूमि से तालुक रखते थे. ऐसे में जब वे वापस आये तो एक दिन किसानों से बातचीत के दौरान उन्हें ‘पॉन्ड कल्चर’ यानी कि मछली पालन के बारे में पता चला. जिसके बाद उन्होंने मछली पालन के क्षेत्र में अपना कदम रखा. बिहटा में 12 एकड़ और आरा के 16 एकड़ तालाब में तीनों ने मिलकर इंडियन मेजर कार्प और जसर मछली का पालन शुरु किया. शुरुआती दिनों में करीब 12 लाख का कारोबार
हुआ. वर्तमान में करीब दो करोड़ से अधिक का कारोबार कर रहे हैं. आशुतोष, आरा

  • 8.46 लाख टन वर्ष 2022- 23 में हुआ था बिहार में मछली का उत्पादन
  • 2021-22 में 7.61 लाख टन की तुलना में यह 85 हजार टन अधिक है
  • 8.02 लाख टन बिहार में सालाना मछली की जरूरत रहती है
  • उत्पादन अधिक होने से मत्स्य व्यापारी दूसरे राज्यों में अधिक मछली भेजने में भी सफल हो रहे हैं
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