मैट्रिक इंटर परीक्षा के दौरान भी होगा पढाई- बिहार बोर्ड ने लिया बड़ा फैसला

मैट्रिक इंटर परीक्षा के दौरान भी होगा पढाई- बिहार बोर्ड ने लिया बड़ा फैसला

मैट्रिक इंटर परीक्षा के दौरान भी होगा पढाई:- इस बार से बिहार बोर्ड की मैट्रिक और इंटर परीक्षा के दौरान कक्षा एक से आठ और नौवीं व 11वीं तक की कक्षा वाधित नहीं होंगी। परीक्षा केंद्र वाले विद्यार्थियों को बगल के स्कूल में मजं किया जाएगा, जहां पर परीक्षा का सेंटर नहीं है, उनकी पढ़ाई उस स्कूल में जारी रहेगी।

राज्य के लगभग 300 विद्यालय में बोर्ड की परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन का कार्य भी होगा। ऐसे में यह भी देखा जाएगा कि उन विद्यालयों में कक्षा नौवीं एवं 11वीं के बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो। राज्य में इंटरमीडिएट की परीक्षा 1 से 12 फरवरी और मैट्रिक की परीक्षा 15 से 23 फरवरी तक आयोजित की जाएगी। शिक्षा विभाग के सचिव वैद्यनाथ यादव के अनुसार हर साल विहार विद्यालय परीक्षा समिति के द्वारा बोर्ड की परीक्षा ली जाती है। बोर्ड की परीक्षा के दौरान पूरे राज्य के सभी स्कूल की कक्षा बाधित हो जाती है। जिन स्कूलों में परीक्षा का केंद्र नहीं होता है, वहां भी कक्षा वाधित रहती थी, क्योंकि वहां के शिक्षक भी परीक्षा की मॉनिटरिंग में लगे रहते थे।

इस बार से ऐसा नहीं होगा। निरीक्षण कार्य के लिए स्कूलों में शिक्षकों की ड्यूटी स्कूलों में उनकी संख्या के हिसाव से लगाई जाएगी ताकि कक्षा बाधित न हो। ऐसा देखा गया है कि विगत सालों में परीक्षा केंद्र के चलते और इन केंद्रों में निरीक्षण के लिए शिक्षक की प्रतिनियुक्ति के चलते 75000 स्कूलों में पढ़ाई का कार्य बाधित होता रहा है। इस कारण हाल ही में जिला शिक्षा पदाधिकारी को निर्देश दिया गया है कि ऐसा ना करें कि परंपरागत तरीके से शिक्षकों की ड्यूटी दे दी जाए, जिससे स्कूल लगभग बंद हो जाए। ड्यूटी लगाने के लिए शिक्षकों का चयन भी अलग से नहीं किया जाना चाहिए, विद्यालय के सारे शिक्षकों का नाम कंप्यूटर सॉफ्टवेयर में डालकर एक निश्चित प्रतिशत के आधार पर शिक्षकों का नाम तय करना होगा।

बोर्ड परीक्षा के दौरान बच्चों की कक्षा बाधित न हो, इसको लेकर जिला शिक्षा कार्यालय की ओर से तैयारी की जा रही है। पटना जिला में जिन स्कूलों में मैट्रिक और इंटर का केंद्र बनाया जाएगा वहां के विद्यार्थियों को बगल के स्कूल में मर्ज किया जाएगा। इसकी सूची जारी की जाएगी।

लगातार तीन दिनों तक अनुपस्थित रहने पर नाम काटने के आदेश से कॉलेजों में ऊहापोह की स्थिति है। उच्च शिक्षा निदेशालय ने बीआरएबीयू समेत सूबे के सभी कॉलेजों के प्राचार्यों को निर्देश दिया है कि जो विद्यार्थी लगातार तीन दिनों तक नहीं आते हैं तो उनका नाम काट दिया जाये। अटेंडेंस रजिस्टर में नहीं आने वाले छात्रों के नाम के आगे एबसेंट लिखा जाय।

बीआरएबीयू शिक्षक संघ के सचिव प्रो. अरुण कुमार सिंह का कहना है कि तीन दिनों तक नहीं आने पर नाम काटने का नियम कहीं नहीं है। यूजीसी के नियम में भी यह बात नहीं है। विवि एक्ट में भी इसका जिक्र नहीं है। 75 फीसदी उपस्थिति नहीं रहने पर एडमिट कार्ड जारी नहीं करने का प्रावधान है। कॉलेजों वपीजी विभागों में 40 फीसदी शिक्षकों के पद खाली हैं। प्रो. ललन झा ने बताया कि पीजी में भी शिक्षकों की कमी है}

बीआरएबीयू के कॉलेजों में 30 प्रतिशत छात्र दूसरे जिलों के पढ़ रहे हैं। प्राचार्यो ने बताया कि विवि के साफ्टवेयर में ही दिक्कत है। बगहा के छात्र को सीतामढ़ी या मुजफ्फरपुर के कॉलेजों में दाखिला के लिए भेज दिया जाता है। इससे कक्षा करने में परेशानी होती है। पीजी विभाग में दूसरे जिले के विद्यार्थी पढ़ रहे हैं।

एलएनडी कॉलेज मोतिहारी के प्राचार्य और बूटा के अध्यक्ष प्रो. अरुण कुमार ने बताया कि नाम काटने के बाद हमलोगों को काफी आक्रोश झेलना पड़ता है। उच्च शिक्षा के लिए यूजीसी नियम तैयार करती है। हमलोग 75 प्रतिशत उपस्थिति का प्रयास कर रहे हैं। एलएनटी कॉलेज के प्राचार्य प्रो. संजय ने बताया कि जो छात्र कॉलेज बिल्कुल नहीं आ रहे हैं, उन्हें चेतावनी पत्र भेजा जा रहा है।

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