मैट्रिक इंटर परीक्षा 2024- बिहार ने दिया परीक्षा केंद्र की जानकारी

मैट्रिक इंटर परीक्षा 2024- बिहार ने दिया परीक्षा केंद्र की जानकारी

मैट्रिक इंटर परीक्षा 2024:-मैट्रिक-इंटर परीक्षा को लेकर बोर्ड के स्तर पर तैयारी जोरों पर है। बिहार बोर्ड ने इस बार व्यवस्था में कई तरह के बदलाव किए हैं। एक केन्द्र पर 5 से 25 कक्ष में परीक्षा आयोजित होगी। जिले में बाद में परीक्षार्थियों के फॉर्म भरने के कारण लगभग 600 संख्या मैट्रिक परीक्षार्थियों की बढ़ गई है। ऐसे में एक अतिरिक्त केन्द्र की खोज हो रही है।

यह केन्द्र शहर के बीच ही खोजा जा रहा है, ताकि परीक्षार्थियों को किसी तरह की दिक्कत न हो। मैट्रिक परीक्षा में एक पाली में 43800 परीक्षार्थियों को बैठाया जाना है। इंटर में एक पाली में 39200 परीक्षार्थी बैठाए जाएंगे।

पिछले साल के तीन केन्द्रों को इस बार सूची से हटाया : पिछले साल के तीन केन्द्रों को इस बार की मैट्रिक-इंटर परीक्षा केन्द्र सूची से हटा दिया गया है। सीटीई तुर्की, पीटीईअसी चंदवारा और पताही को इस बार केन्द्र नहीं बनाया गया है। पांच केन्द्रों को पहली बार इन परीक्षाओं के लिए चयनित किया गया है। इस बार परीक्षा में पूरी पारदर्शिता बरतने को लेकर कई तरह की पहल की जा रही है।

जिले में 2024 की मैट्रिक परीक्षा 78 केन्द्रों पर होगी, जिनमें 46 केन्द्र छात्राओं के लिए हैं। 32 केन्द्र छात्रों के लिए बनाए गए हैं। पिछले वर्ष की अपेक्षा इस बार तीन अधिक केन्द्र होंगे। पिछली बार 76 केन्द्र थे, वहीं इस बार अब तक 78 बने हैं। इसमें एक और केन्द्र की बढ़ोतरी होगी।

इंटर परीक्षा में पिछले साल की अपेक्षा इस बार केन्द्रों की संख्या कम हो गई है। हालांकि परीक्षार्थियों की संख्या पिछले साल की अपेक्षा इस बार एक हजार के लगभग अधिक है। इंटर में इस बार कुल 64 केन्द्र बने हैं, वहीं 2023 की परीक्षा में 67 केन्द्र बने थे। परीक्षार्थियों की संख्या 56250 थी, वहीं इस बार यह संख्या 57972 है।

  • 01 केन्द्र पर पांच से 25 कक्ष में आयोजित होगी परीक्षा
  • 43 हजार से अधिक परीक्षार्थी मैट्रिक की एक पाली में बैठेंगे

सरकारी स्कूलों में अब आखिरी पीरियड (घंटी) तक बच्चों की निगरानी होगी. एक दिसंबर से स्कूलों का शेड्यूल बदल गया है. इसके साथ ही निरीक्षण रिपोर्ट का फॉर्मेट भी बदल दिया गया है. डीइओ अजय कुमार सिंह ने विद्यालयों के निरीक्षण को लेकर सभी संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिया है, सभी विद्यालयों का संचालन सुबह नौ बजे से होना है.

डीइओ ने कहा है कि संबंधित निरीक्षी पदाधिकारी प्रखंड के किसी एक स्कूल में सुबह 9.15 बजे निरीक्षण के लिए पहुंच जायेंगे. वे चेतना सत्र की समाप्ति तक स्कूल में रुकेंगे और विभिन्न गतिविधियों की फोटो नोट कैम ऐप के माध्यम से मुख्यालय को उपलब्ध करायेंगे. सुबह 9.15 से 9.30 बजे तक की अवधि में फोटो भेजने का निर्देश दिया गया है. डीइओ ने कहा है कि जो निरीक्षी पदाधिकारी नोट कैम ऐप से फोटो नहीं भेजेंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई संभव है. निरीक्षण के दौरान एमडीएम, शौचालय, वर्गकक्ष,लाइब्रेरी, लैब व कैंपस की तस्वीरें भी भेजनी है|

स्कूलों के निरीक्षण की जिम्मेदारी सभी प्रखंडों में बीइओ से लेकर साधनसेवी तक को दी गयी है. डीइओ की ओर से सभी प्रखंडों के बीइओ, तकनीकी उप प्रबंधक, प्रखंड कार्यालय में प्रतिनियुक्त लिपिक, प्रखंड परियोजना प्रबंधक, लेखा सहायक सह डाटा इंट्री ऑपरेटर, प्रखंड में कार्यरत सभी डाटा इंट्री ऑपरेटर, प्रखंड साधनसेवी, पीएम पोषण योजना के साधनसेवी व समावेशी शिक्षा के संसाधन शिक्षकों को निरीक्षण के लिए निर्देश दिया गया है.

निरीक्षण के दौरान स्कूल में मिशन दक्ष के तहत संचालित कक्षाओं की रिपोर्ट भी फॉर्मेट में देनी है. तीसरी से आठवीं कक्षा तक के चिह्नित बच्चों की वर्गवार कितनी कक्षाएं संचालित की गयी, इसकी जानकारी देनी है. इसके अलावा यदि पिछले कार्य दिवस पर किसी शिक्षक ने दक्ष के तहत चिह्नित बच्चों की क्लास नहीं ली है, तो उनकी जानकारी भी फॉर्मेट में देने को

बीपीएससी से चयनित शिक्षकों को सैलरी के लिए अभी इंतजार करना पड़ेगा. विभाग की ओर से पूर्व में दिसंबर के पहले सप्ताह तक उन्हें वेतन जारी करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, लेकिन जिले में अब तक बड़ी संख्या में शिक्षकों का प्रान जेनरेट नहीं हो सका है. जिले में अब तक 5660 ने विद्यालयों में योगदान दे दिया है. इसमें 3397 का प्रान (परमानेंट रिटायरमेंट अकाउंट नंबर) जेनरेट हुआ, जबकि केवल 218 का ही शिक्षा विभाग से वेरीफाई हो सका है.

प्रान जेनरेट करने वाले शिक्षकों ने गलत एंट्री दर्ज किया है, जिसके कारण अप्रूव्ड नहीं किया गया है. माना जा रहा है कि सभी शिक्षकों का प्रान विभाग से वेरीफाई होने दो सप्ताह से अधिक का समय लग सकता है. प्रान जेनरेट करने के क्रम में शिक्षकों को पोर्टल पर दिये गये कॉलम में गवर्नमेंट सब्सक्राइबर पर क्लिक करना होगा. इंडीविजुअल के ऑप्शन पर क्लिक करने पर इसमें दुबारा सुधार की जरूरत बनी रहती है. अधिकांश शिक्षकों ने जानकारी के अभाव में इंडीविजुअल के विकल्प का चुनाव कर लिया है. वहीं शिक्षकों को जन्म तिथि को आधार मानकर अपने रिटायरमेंट की तिथि की गणना करनी थी, लेकिन उन्होंने अपने योगदान की तिथि को आधार मानकर रिटायरमेंट की तिथि दर्ज कर दी है.

जिला शिक्षा विभाग की ओर से शिक्षकों के सभी दस्तावेजों को ट्रेजरी में भेजने से पहले वेरीफाई में कई प्रकार की गलतियां सामने आयी हैं. डीपीओ स्थापना डॉ प्रफुल्ल कुमार मिश्र ने बताया कि कई शिक्षकों ने गलत एंट्री दर्ज की है. इसमें सुधार के लिए उसे वापस किया गया है. इसमें सुधार कर दुबारा आवेदन करना होगा. कहा कि वेतन भुगतान को लेकर प्रक्रिया चल रही है.

गलत एंट्री के कारण ट्रेजरी में भेजे जाने से पूर्व सुधार के लिए शिक्षकों के डॉक्युमेंट को रिजेक्ट कर दिया गया है. अब शिक्षकों को मानक के अनुसार डॉक्युमेंट जमा करना होगा. जिला शिक्षा विभाग की माने तो अब तक केवल 218 शिक्षकों के प्रान जेनरेट के बाद उसे तमाम डॉक्युमेंट्स के साथ वेरीफाई करते हुए ट्रेजरी में भेजा गया है. एनएसडीएल का सर्वर स्लो होने के कारण भी इसमें विलंब हो रहा है. साथ ही एक साथ एक ही सिस्टम पर एक यूजर आइडी और पासवर्ड से ही शिक्षकों के डॉक्यूमेंट्स का वेरीफिकेशन संभव है. इस प्रक्रिया में काफी समय लग रहा है|

शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव केके पाठक ने दो दिन पहले वीसी के दौरान योगदान कर चुके 90 हजार शिक्षकों और अगले चरणों में योगदान करने वाले शिक्षकों को एचआरएमएस की जगह पुराने सीएफएमएस सिस्टम से ही वेतन का भुगतान करने की बात कही थी. साथ ही उनके प्रान नंबर के आधार पर मैनुअली कटौती करते हुए उनके पेंशन खाते में भुगतान की
व्यवस्था बनाने पर सहमति जताई थी.

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